न्याय की अवधारणा क्या है?
क्या ईश्वरीय न्याय का अस्तित्व है अथवा पीड़ित/कमजोर के मन की सन्तुष्टी मात्र है ?
सन्दर्भ :- आज सुबह सुबह अखबार मे दिखा ट्रिपल मर्डर केस मे शहबुदीन बरी
तकरीबन 27 साल पहले लौहनगरी जमशेदपुर ( टाटा)सरेआम 3 लोगो को गोलियों से भुन गया दिया गया था। इसमे शायद कुल 4 आरोपी थे।
रामा सिंह - वर्तमान मे वैशाली से सांसद
शहबुदीन - किसी परिचय के मुहताज नही
साहेब सिंह - इस घटना के बाद टाटा के स्थापित माफिया बन गए थे पुलिस मुठभेड़ मे मारे ज चुके है।
वीरेंद्र सिंह -यूपी मे हत्या हो चुकी है।
सनद रहे कोर्ट सबूतो ओर गवाहों के आधार पर फैसला सुनाती है।
क्या ईश्वरीय न्याय का अस्तित्व है अथवा पीड़ित/कमजोर के मन की सन्तुष्टी मात्र है ?
सन्दर्भ :- आज सुबह सुबह अखबार मे दिखा ट्रिपल मर्डर केस मे शहबुदीन बरी
तकरीबन 27 साल पहले लौहनगरी जमशेदपुर ( टाटा)सरेआम 3 लोगो को गोलियों से भुन गया दिया गया था। इसमे शायद कुल 4 आरोपी थे।
रामा सिंह - वर्तमान मे वैशाली से सांसद
शहबुदीन - किसी परिचय के मुहताज नही
साहेब सिंह - इस घटना के बाद टाटा के स्थापित माफिया बन गए थे पुलिस मुठभेड़ मे मारे ज चुके है।
वीरेंद्र सिंह -यूपी मे हत्या हो चुकी है।
सनद रहे कोर्ट सबूतो ओर गवाहों के आधार पर फैसला सुनाती है।
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