#खदेरन
थाना सीताराम डेरा के सामने से सिदगोड़ा जाने वाले रास्ते के कॉर्नर के पान दुकान से रजनीगंधा /तुलसी खरीद के पाउच फाड़ते जेसे पीछे मुड़ा कि खदेरन अवाक !! सामने एक हलकी सांवली महिला खड़ी थी एक 6/7 साल के बच्ची का हाथ पकड़े हुये ,
धक धक करते हुये कलेजे के साथ एकटक देखता रह गया उस बंग कन्या को . कुछ कुछ विशालकाय पूरे 5 महीने के प्रेग्नेंट औरत जैसी ओर 17 साल के मासूम चेहरे वाली 35 साल की सम्भ्रांत महिला को।
ध्यान भंग हुआ कोयल जैसी मधुर आवाज से तुम खदेरन ?!
तंद्रा भंग होते आवाज निकली आ~ए~प्प प निरु ~~प्प पममा ....।
हलाकि इतना बोलने मे भी लिप प्लेट(होठ का ऊपरी हिस्सा) और कलेप्त फड़फड़ाने लगा था।
एक मुस्कान के साथ हा !! सुनते ही शरीर के तमाम मसामो मे टनो पसीना उगल दिया ।
एक हाथ मे रजनीगंधा का फटा पाउच पकड़े हुये पैंट सम्भलने लगा खदेरन।
कैसे हो तुम ? कंहा रहते हो ?? शादी हो गयी ???
भाभी जी कैसी है ??
जैसे आधा दर्जन सवाल
फिर एक और डिस्कृपसंन काफी यंग और स्मार्ट लग रहे हो ।
हा हा, हम तो बुढ़े हो गए कहते हुये हाथ और होठ कॉप रहे थे। (अचानक 25 साल पहले का समय गुजर गया खदेरन के सामने से फिर भी इतना भी नही बोल पाया तुम बहुत खूबसूरत हो , सौंदर्य की देवी )
किसी भावुक भक्त की भांति सिर्फ सुनता रहा , मिस्टर घोष यहो कम्पनी मे लेबर सूपरी ड़ेंटेंत है तुमलोग मे तो जल्दी शादी होती।है हम तो काफी मोटो गयी प्रेग्नेंसी के बाद आदि इत्यादि .....
अचानक संयत होते खदेरन बोल पड़ा कही जाना है ,
रुकना यांही अभी आते है दौड़ लगा दी अपने घर के तरफ ।
घर आते ही अपनी ललकि मारुति को पोंछने पिल पड़ा डस्टर लेकर, फिर ध्यान आया सामने खड़ी चम चमा ती छोटे भाई की क्रेटा का।
मोनू गाड़ी का चाभी लाओ , झपटते हुए चाभि काबू किया ,
फिर आईने मे खुद को देखा SरRर
अरे बाबा 3000 रुपये मीटर के पैंट पर बिना क्रिज के शर्ट पैर मे हवाई चप्पल। अकचका गीय खदेरन हालांकि कल इसी ड्रेस मे शहर के सबसे महंगे बार मे उसके मैनेजर को रगड़ के आया था ,
लेकिन आज अपने को हीन समझ रहा था। सुबह की बनाई शेव पुरानी लग रही थी।
खैर क्रेटा मोड़ने लगा लगा की सामने से 1989 मोडेल वेस्पा स्कूटर पर पिच्छे बइठल स्माइल देते निकल गए ~~|@?$-'
गुस्सा मे आग भेल गाड़ी को रोड पर घर मे घुसते , मोनुआ पर वरस पड़ा झ~?+×| टाइप के गाड़ी खरीद लिया है काटने मे 3 घण्टा लगता है।
चल जाके टिकट ले के आओ हमको नई रहना है बहूत जरूरी काम है
थाना सीताराम डेरा के सामने से सिदगोड़ा जाने वाले रास्ते के कॉर्नर के पान दुकान से रजनीगंधा /तुलसी खरीद के पाउच फाड़ते जेसे पीछे मुड़ा कि खदेरन अवाक !! सामने एक हलकी सांवली महिला खड़ी थी एक 6/7 साल के बच्ची का हाथ पकड़े हुये ,
धक धक करते हुये कलेजे के साथ एकटक देखता रह गया उस बंग कन्या को . कुछ कुछ विशालकाय पूरे 5 महीने के प्रेग्नेंट औरत जैसी ओर 17 साल के मासूम चेहरे वाली 35 साल की सम्भ्रांत महिला को।
ध्यान भंग हुआ कोयल जैसी मधुर आवाज से तुम खदेरन ?!
तंद्रा भंग होते आवाज निकली आ~ए~प्प प निरु ~~प्प पममा ....।
हलाकि इतना बोलने मे भी लिप प्लेट(होठ का ऊपरी हिस्सा) और कलेप्त फड़फड़ाने लगा था।
एक मुस्कान के साथ हा !! सुनते ही शरीर के तमाम मसामो मे टनो पसीना उगल दिया ।
एक हाथ मे रजनीगंधा का फटा पाउच पकड़े हुये पैंट सम्भलने लगा खदेरन।
कैसे हो तुम ? कंहा रहते हो ?? शादी हो गयी ???
भाभी जी कैसी है ??
जैसे आधा दर्जन सवाल
फिर एक और डिस्कृपसंन काफी यंग और स्मार्ट लग रहे हो ।
हा हा, हम तो बुढ़े हो गए कहते हुये हाथ और होठ कॉप रहे थे। (अचानक 25 साल पहले का समय गुजर गया खदेरन के सामने से फिर भी इतना भी नही बोल पाया तुम बहुत खूबसूरत हो , सौंदर्य की देवी )
किसी भावुक भक्त की भांति सिर्फ सुनता रहा , मिस्टर घोष यहो कम्पनी मे लेबर सूपरी ड़ेंटेंत है तुमलोग मे तो जल्दी शादी होती।है हम तो काफी मोटो गयी प्रेग्नेंसी के बाद आदि इत्यादि .....
अचानक संयत होते खदेरन बोल पड़ा कही जाना है ,
रुकना यांही अभी आते है दौड़ लगा दी अपने घर के तरफ ।
घर आते ही अपनी ललकि मारुति को पोंछने पिल पड़ा डस्टर लेकर, फिर ध्यान आया सामने खड़ी चम चमा ती छोटे भाई की क्रेटा का।
मोनू गाड़ी का चाभी लाओ , झपटते हुए चाभि काबू किया ,
फिर आईने मे खुद को देखा SरRर
अरे बाबा 3000 रुपये मीटर के पैंट पर बिना क्रिज के शर्ट पैर मे हवाई चप्पल। अकचका गीय खदेरन हालांकि कल इसी ड्रेस मे शहर के सबसे महंगे बार मे उसके मैनेजर को रगड़ के आया था ,
लेकिन आज अपने को हीन समझ रहा था। सुबह की बनाई शेव पुरानी लग रही थी।
खैर क्रेटा मोड़ने लगा लगा की सामने से 1989 मोडेल वेस्पा स्कूटर पर पिच्छे बइठल स्माइल देते निकल गए ~~|@?$-'
गुस्सा मे आग भेल गाड़ी को रोड पर घर मे घुसते , मोनुआ पर वरस पड़ा झ~?+×| टाइप के गाड़ी खरीद लिया है काटने मे 3 घण्टा लगता है।
चल जाके टिकट ले के आओ हमको नई रहना है बहूत जरूरी काम है