हिदुस्तनियत से आगे निकलकर कश्मीरियत हावी हो गयी है।
समाजिक बैलेंस खत्म मममला शुरू तो सबसे जरूरी है समाजिक संतुलन बनाने की ।
बकि लाख जतन कर लो कुछ होनेवाला नई , करोड़ो लूटकर कश्मीरियो का तुम दिल नही जीत सकते।
ओर हा न पैलेटगन ओर एके -47 से अनन्तकाल तक झुका भी नही सकते।
ओर ह बेबकूफ/धूर्त कश्मीरी तुम भी पत्थर फेक कर या बम फोड़कर कुछ हासिल नही कर सकते ।
तो भइया ऐसा है की दोनो के विकल्प सीमित है इसलिये बात को बूझो ।
कश्मीर का हल ना नश्तर मे है ना मलहम मे !! सिर्फ ओर सिर्फ सामाजिक संतुलन मे है।समाजिक बनाबट चेंज किये बिना क ट्रोल नही कर सकते। सामाजिक बनाबट जैसे दिल्ली का है पटना का है पूरे हिन्दुस्तान का है। हर हिन्दुस्तानी नोकरी कर सके , जमीन खरीद सके । बस सके तभहि कुछ हो सकता है ओर एकमात्र समाधान है
वरना कश्मीरी अभिशप्त जिंदगी जीने मजबूर रहेंगे !! ना आजादी मिलेगी न जन्नत।
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